ग़रीब नवाज़ (Ghareeb Nawaaz)

खुदा मिलता नहीं कभी ऐश-ओ-आरामों में
तेरी तकलीफ में मगर आगे खड़ा रहे सदा

ग़मों का ग़म न कर है बड़ा वो ग़रीब नवाज़
थाम लेगा तुझे बख्श देगा वो तेरी हर खता

है उसी का ज़िक्र सभी मन्त्रों और आयतों में
ज़र्रा ज़र्रा ज़मीर का तुझे देगा उसी का पता

अब जो खोया है दौलतों और शोहरतों में तू
नहीं पायेगा कभी मेरे परवरदिगार का पता

नेक नीयत ज़ुबान साफ़ रूह बने पाकीज़ा
पाक दिल में ही रहा करता है वो मेरा खुदा

खुदा मिलता नहीं कभी ऐश-ओ-आरामों में
तेरी तकलीफ में मगर आगे खड़ा रहे सदा

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