कुछ न करो (Kuchh Na Karo)

कुछ न करो
कुछ भी न करो
क्या करना है
क्यों करना है

कारवां पीछे तू आगे हो गया है
समय का पल थम सा गया है
बस तुम और कोई भी नहीं है
चंचल मन की दौड़ भी थमी है
कुछ न करो
कुछ भी न करो

कितने गहरे हलके
जग के रंग बदलते
धुंध के देखो छटते बादल
जैसे कोई आँचल ढलके

कारवां पीछे तू आगे हो गया है
समय का पल थम सा गया है
बस तुम और कोई भी नहीं है
चंचल मन की दौड़ भी थमी है
कुछ न करो
कुछ भी न करो

मिथ्या रिश्ते नाते
तिनका तिनका बिखरे
तुमको डराते शाम के साये
उड़ गए पंछी जैसे

कुछ न करो
कुछ भी न करो
क्या करना है
क्यों करना है

 

 

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