खुदाई (Khudai)

वाह ऐ खुदाया ये तेरी खुदाई
छोटे बड़े का कैसा खेल रचाया
सोच छोटी है बड़े दिलवालों की
दिल छोटों का भी छोटा ही पाया

तोलते दौलत में ज़ज़्बात दिल के
बिखरे रिश्तों का बाज़ार लगाया
दिल की तो हालत है आज ऐसी
धोखे का उसको मोहरा बनाया

दिल की बातें कहाँ कोई समझा
दौलत ने सबको अजब भरमाया
किस पर करे भरोसा आस रखें
मासूम दिल को छलनी बनाया

हंसीं मोड़ पर थी अपनी कहानी
न थी कोई फ़िक्रऔर न ग़म था
सफीना इस दिल का वहां जा डूबा
समंदर में जहां पानी कम था

ज़ज़्बात दिलों के दफन हो चले हैं
अब सिर्फ बातें हैं बातों का क्या
दर्द इस दिल का किसको बताएं
कोई बताये हम करें तो करें क्या

दिल की बातें कहाँ कोई समझा
दौलत ने सबको अजब भरमाया
किस पर करे भरोसा आस रखें
मासूम दिल को छलनी बनाया

 

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