खुल गयी खुल गयी (Khul Gayi Khul Gayi)

खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
सपनों के ताज़ा रस की दूकान

सुन्दर सुन्दर सपनों के
ताज़ा ताज़ा रस की दूकान
हरे हरे सपनों से बने
मनभावन रस की दूकान

खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
सपनों के ताज़ा रस की दूकान

मन मयूर को नाच नचा दे
सपनों को दे एक नयी उड़ान
अदरक नीबू पोदीना युक्त
रस कर दे बूढ़े को भी जवान

खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
सपनों के ताज़ा रस की दूकान

दूर देस जाकर के हम
मीठे सपने सजाते हैं
चाँद तारों के पार जहाँ के
भी उस पार से लाते हैं
एक गिलास तो पीकर देखो
कहाँ जाते हो श्रीमान

खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
सपनों के ताज़ा रस की दूकान

सपनों को चुन सुन कर हम
धोकर दूकान पर लाते हैं
बड़े प्यार से रस इनका
आप तक फिर पहुंचाते हैं
आओ आओ सब पियो
आपकी ही अपनी दूकान

खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
सपनों के ताज़ा रस की दूकान

एक पर न रुक पाओगे
रास लाजवाब मिलेगा
मीठा खट्टा नमकीन तीखा
तुमको हर स्वाद मिलेगा
छोटा बड़ा या मीडियम
कौन सा दे दूँ मेरी जान

खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
सपनों के ताज़ा रस की दूकान

जीवन जैसे है तीखी चाट
मीठे होते हैं सपने
दिल बैठ सा जाता है
धोखा दे जाते जब अपने
रूह को ठंडी कर देगा
ये वादा है भाई जान

खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
खुल गयी खुल गयी खुल गयी है
सपनों के ताज़ा रस की दूकान

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