चुस्की चाय की (Chuski Chay Ki)

बर्तन में ले लो पानी जरा
अदरक मसाला डालो खरा
गैस पे रख बर्तन को सजन
उबाल आएगा रुको ज़रा

चीनी संग हो चाय की पत्ती
मिले दूध खिल जाए मस्ती
उबलने दो कुछ देर तलक
ध्यान रखना न जाए छलक

कप में छानो चाय की धार
सुड़ुप सुड़ुप पिओ अमृतधार
पीकर गायब सारी थकान
कवि बिरजू देते तुम्हें ज्ञान

भोर की शान चाय की प्याली
पत्नी मुस्काये झूमे साली
रोज पिएं घर मौज मनाएं
अपनों के दिलों को लुभाएं

कप में छानो चाय की धार
सुड़ुप सुड़ुप पिओ अमृतधार
पीकर गायब सारी थकान
कवि बिरजू देते तुम्हें ज्ञान

चाय पर चले यारों की चर्चा
काम बन जाए हो कम खर्चा
चाय के प्याले में प्रेम गाथा
सुगंध में प्रीत की अभिलाषा

कप में छानो चाय की धार
सुड़ुप सुड़ुप पिओ अमृतधार
पीकर गायब सारी थकान
कवि बिरजू देते तुम्हें ज्ञान

किसी ने ठीक ही कहा है

अरे किसी ने क्या मैंने ही कहा है बे

बढ़िया चाय बनाने को पानी चौथाई कप
मसाला अदरक डारि गरम करो सटसट
चाय पत्ती दूध चीनी डाल खूब उबालो
रंग चोखौ जब आय चाय कप में निथारो
कह कविवर बिरजू ताज़गी मनहर लेगी
पत्नी संग पीयो निसदिन बलाइयां लेगी

कप में छानो चाय की धार
सुड़ुप सुड़ुप पिओ अमृतधार
पीकर गायब सारी थकान
कवि बिरजू देते तुम्हें ज्ञान

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