माँ बाबा तुम अपने थे क्यों आज बेगाने लगते हो
क्यों बेटी की नज़रों में खुद को पराया करते हो
बाबा ने पलकों पे रखा हर दुःख से तनहा रखा
क्षमता से हर संभव सुख देने का प्रयास किया
मन असमंजस में है माँ कुछ देर मेरे साथ रहो
माथे पर ममता का प्यार भरा एक हाथ रख दो
एक छवि थी दिल में अब दिल में कोलाहल है
देखा नहीं जिसको क्यों आज मेरा सब कुछ है
है प्रश्न मेरे जीवन का मेरे दिल से भी तो पूछो
कैसा हो जीवनसाथी यह अधिकार मुझे ही दो
नहीं चाहिए वर ऐसा जो कदमों में जहाँ रख दे
समझे अपना बस मुझको नज़रों में सम्मान रखे
