भड़भड़ हो जावै तेज(BHJT)

लहसन खाकर उसने जो चूमा मुझे  

आत्मा छाती से मेरी बाहर फिसल गई

प्याज खा कर सैंया ने जो पादा  सखी  

बिना टिकट लिए मैं पाताल निकल गई  

खैनी-गुटखा खाकर थूके जो वो बुरादा,

नई डाइनिंग टेबल देख, कल जो बनी।  

सुबह का हैंगओवर थू है ज़िन्दगी पर  

दुर्गंध न जाने वो है किस लैब  में बनी  

हाफ़ स्लीव बनियान से झांकती बगलें  

बाल पकड़ कर छिपकली एक चढ़ी  

पान खाकर चौक पर बहाई जो रंगत  

करामात देख कर मैं लालम लाल हुई  

सॉक्स घर में आकर   उतारते साहब  

बुसती है चुहिया जैसे सड़ी मरी पड़ी  

दिल की धड़कन भड़भड़ हो जावै तेज  

टॉयलेट की नाईं  जो रुख इनने  करी  

क्या कहती है तू क्यों छोड़ दूं  सखी  

इनकम दिनकम देख के है शादी करी

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