मिर्जा गायब (Mirzaa Ghaayab)

टॉयलेट में से शीशा गायब
गठरी है पर पैसा गायब
पैसा है पर माल गायब
घर में रोटी दाल गायब
बाह रे शहर तेरा कमाल
जेब से है रूमाल गायब

रातों की है नींद गायब
दिल से है उम्मीद गायब
सब अनजान अपने गायब
आँखों से हैं सपने गायब
बाग में पेड़ बहार गायब
वक्त पे रिश्तेदार गायब

दिल का प्यार यार गायब
बहन भाई का प्यार गायब
बंदा सीधा सच्चा गायब
माँ रोती है बच्चा गायब
बेचैनी है चैन गायब
लिखने लगो तो पेन गायब

गोरी का श्रृंगार गायब
पायल की झंकार गायब
ढोलक से है खाल गायब
गीतों से मल्हार गायब
बिजली गायब पानी गायब
रस्में सब पुरानी गायब
शहर तेरा  क्या बुरा हाल
रोगी हैं अस्पताल गायब

बच्चों में है बचपन गायब
गबरू का बांकपन गायब
नदियों से हुआ पानी गायब
नानी  की  कहानी  गायब
दादी का  दुलार गायब
पंछियों का कलरव गायब

कितना मेरे संग खेलोगे
गांव शहर कब तक झेलोगे
आखिर में निष्कर्ष यही है
दोनों में कोई फर्क नहीं है
आज जरा कुछ मन उदास था
मेरे लिए यह टाइम पास था
सच कहता हूँ बहुत काम है
अब हो जाओ तुम भी गायब

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