एक जश्न (Ek Jashn)

मनाओ जश्न फिर कोई मर गया
किसी के लिए जगह खाली कर गया
किसी को मगर सवाली कर गया
किसी को मगर सवाली कर गया
मनाओ जश्न फिर कोई मर गया

कांधों पे बोझ सपनों की ताबीर का
बोझ अपनों का और परायी पीर का
हर तरह के बोझ से हो फारिग गया
हर तरह के बोझ से हो फारिग गया
मनाओ जश्न फिर कोई मर गया

भटकन थी हर सू ज़िन्दगी की राह में
कभी दोस्ती कभी दिल की चाह में
किसी की उल्फत में फ़ना होकर गया
किसी की उल्फत में फ़ना होकर गया
मनाओ जश्न फिर कोई मर गया

ज़िन्दगी हो गयी बेवफा दे दिया दग़ा
मौत की सच्ची वफ़ा में चल वो दिया
जन्मों का रहेगा साथ, यकीं पर गया
जन्मों का रहेगा साथ, यकीं पर गया
मनाओ जश्न फिर कोई मर गया

लौट कर न आएगा न दो सदा उसे
कोई किसी का नहीं बताओ उसे
अलविदा कहो राही मंज़िल पा गया
अलविदा कहो राही मंज़िल पा गया
मनाओ जश्न फिर कोई मर गया

मनाओ जश्न फिर कोई मर गया
किसी के लिए जगह खाली कर गया
किसी को मगर सवाली कर गया
किसी को मगर सवाली कर गया
मनाओ जश्न फिर कोई मर गया

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