तेरी चाय के कप पे
मेरा नाम लिखा था
अब मेज़ पर है बुझी
मोमबत्ती का धुआं
तेरी चप्पल के निशान
छपे हैं दरवाज़े पे
इसे मैं क्या समझूँ
तू यहीं थी कल रात
क्या बोलूं अब
जब सब खत्म सा लगे
तेरे बिना
ये घर मुझे वीरान लगे
मेरी आँखों में
टुकड़ों में कहानी
और हाथों में
तेरी पुरानी निशानी
अधूरी रात
अधूरी बात
अधूरी रात
तू नहीं साथ
अधूरी रात
मेरा दिन उदास
अधूरी रात
तू नहीं है, पास
तेरे बाद भी मैंने
खिड़की खोली बहुत
पर जो तेरे साथ था
रौशनी नहीं आयी
कैलेंडर के कोने में
तेरे लिखे हुए नोट
मैंने काट दिए, फिर भी
दिल ने याद दिलाये
तेरी आवाज़ के बिना
है बस अब शोरगुल
मेरे अंदर का शहर
जैसे उजड़ गया
क्या बोलूं अब
जब सब खत्म सा लगे
तेरे बिना
ये घर मुझे वीरान लगे
मेरी आँखों में
टुकड़ों में कहानी
और हाथों में
तेरी पुरानी निशानी
अधूरी रात
अधूरी बात
अधूरी रात
तू नहीं साथ
अधूरी रात
मेरा दिन उदास
अधूरी रात
तू नहीं, बस पास
