[Instrumental Intro: Sound of multiple wall clocks ticking in chaos, out of sync, followed by a catchy acoustic guitar pluck]
[Chorus – Conversational style, slightly bewildered tone]
मेरे घर में दीवार घड़ियों की खासी गिनती है।
एक घड़ी फीमेल और फेमिनिस्ट लगती है।
[Verse 1 – Rhythmic storytelling]
बाकी घड़ियों से हमेशा समय आगे वो बताती है।
सेट करूँ तब भी औरों से आगे निकल जाती है।
समय क्या हुआ मिनट और सेकंड उसके घंटे से।
ऐरो और गैरों को वो अपने मुँह नहीं लगाती है।
अपनी कम्युनिटी में उसकी किसी से न बनती है।
[Chorus – With a steady rhythmic beat]
मेरे घर में दीवार घड़ियों की खासी गिनती है।
एक घड़ी फीमेल और फेमिनिस्ट लगती है।
[Verse 2 – Gaining speed, funny and dramatic]
सात बजे बोलूँ मैं तो पौने सात ही उठा देती है।
सोते हुए के कान में युद्ध बिगुल बजा देती है।
सेल बदल लिया, नए को भी मुँह चिढ़ा देती है।
पीछा छुड़ा लूँ उससे जो मैं अगर सोचूँ तो।
[Spoken Dramatic Pause] घड़ी आयोग में शिकायत दर्ज करा देती है!
समय खराब है मेरा उससे रोज़ ठनती है।
[Chorus – Catchy indie pulse]
मेरे घर में दीवार घड़ियों की खासी गिनती है।
एक घड़ी फीमेल और फेमिनिस्ट लगती है।
[Verse 3 – Poignant yet satirical, addressing the crowd]
पता नहीं दोस्तों वो आखिर क्या चाहती है।
सामान अधिकार हाँ ठीक है वो फेमिनिस्ट है
बताये तो मुझे मैडम जाना कहाँ चाहती है।
आगे चलती है वो कहीं मैं ही न गिर जाऊँ।
समय से पहले कहीं अलविदा कह जाऊँ।
बचा लो जनता आपसे कर बद्ध बिनती है।
[Chorus – Grand finale, ticking clocks intensify]
मेरे घर में दीवार घड़ियों की खासी गिनती है।
एक घड़ी फीमेल और फेमिनिस्ट लगती है।
[Outro – All instruments fade out, leaving only one loud, fast ticking sound]
एक घड़ी फीमेल और फेमिनिस्ट लगती है…
[A sharp clock alarm rings once and suddenly stops]
