तेरे इंकार की हद(TIKH)

तेरे इंकार की हद,
और मेरी हद से गुज़र जाने की ज़िद,
तुम होते गए इश्क़ में क़ुर्बान,
और हुआ कुछ मैं भी ज़ाहिद।

जीत लिया हमने यूँ ज़माना,
आसान हो गई हर मुश्किल।
आया है तू जब से जीवन में,
ख़ुशी जीवन में हुई हासिल।

आया है तू जब से जीवन में,
ख़ुशी जीवन में हुई शामिल।

छोड़ा ज़माना, छोड़ी सब बातें,
तसव्वुर में गुज़रती हैं अब रातें।
सोचा भी न था, जो हुआ है अब,
मिल गए मेरे ख़्वाबों को पर।

उड़ने लगी हैं ये ख़्वाहिशें मेरी,
तू जो मिला तो राह मिली नई।
कल तक जो था बस सपना,
बन गई है वो हक़ीक़त मेरी।

[Final Chorus]
आया है तू जब से जीवन में,
ख़ुशी जीवन में हुई शामिल।
आया है तू जब से जीवन में,
ख़ुशी जीवन में हुई शामिल।
ख़ुशी जीवन में हुई शामिल।

[Outro]
ख़ुशी जीवन में हुई शामिल…

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