देख बे दर्द खड़ा है वहां
चल आज इसे बताते हैं
आज नहीं छोड़ेंगे इसको
यही पे चटनी बनाते हैं
रूक बे…. रु रु रु रु रुक बे!
ऊँगली टेढ़ी अपनी करनी ही पड़ेगी
सीधी से दर्द निकलेगा नहीं
कान के नीचे बजेगा नहीं जब तक
भेजे में इसके घुसेगा नहीं
हाथ पैर तोड़ इसके हड्डियों का
चूरन हलक में डाल
नाक मोड़ इसकी कनपटी सेक
चिकन तंदूरी बनेगा यहीं
ऊँगली टेढ़ी अपनी करनी ही पड़ेगी
सीधी से दर्द निकलेगा नहीं
कान के नीचे बजेगा नहीं जब तक
भेजे में इसके घुसेगा नहीं
पेट में एक पीठ में दे तीन
बाल खींच चीखेगा जब
चार हैं हम तू अकेला मरियल
हमसे जीत पायेगा नहीं
ऊँगली टेढ़ी अपनी करनी ही पड़ेगी
सीधी से दर्द निकलेगा नहीं
कान के नीचे बजेगा नहीं जब तक
भेजे में इसके घुसेगा नहीं
आज चल माफ़ किया
बच्चा जान छोड़ दिया कल से
गली में दिखने का नहीं
क्या कहा होश में है ला इसका
फाइनल ही गेम बजा
बिरजू की नहीं इसे अवनीत
की एक कविता दे सुना
जिसने सुनी कसम से मरा है
कोई भी बचा ही नहीं
ऊँगली टेढ़ी जब तक न करो
सीधी से दर्द निकलता नहीं
कान के नीचे बजे न जब तक
भेजे में कुछ घुसता नहीं
