रूबरू तुम हो एहसास जानलेवा है
छू लिया तुमने, क़यामत हो गयी हैरूबरू तुम हो, एहसास जानलेवा है
शब्-ए-दीदार है हटती नहीं निगाहें
शब्-ए-दीदार है हटती नहीं निगाहें
खो न दें तुम्हें कहीं, पत्थर हो गयी हैंआपके ख़यालों में गुज़रती हैं शामें
आपके ख़यालों में गुज़रती हैं शामें
ख़्वाब-ओ-तस्सवुर में सुलह हो गयी हैतुम पे आशना हैं मगर डरता है दिल
तुम पे आशना हैं मगर डरता है दिल
अब छुपाए न बने मुश्किल हो गयी हैसर-ए-महफ़िल तलाशतीं है किसको
सर-ए-महफ़िल तलाशतीं है किसको
क्या नज़रें गैर की कायल हो गयी हैंमेरे अंदाज़ पर यूँ बेबाक हंस देना
मेरे अंदाज़ पर यूँ बेबाक हंस देना
मान भी जाओ मुहब्बत हो गयी हैतुम तुम न रहे रहा मैं भी मैं नहीं
तुम तुम न रहे रहा मैं भी मैं नहीं
तारीख बनने की वजह हो गयी हैरूबरू तुम हो एहसास जानलेवा है
छू लिया तुमने, क़यामत हो गयी है
2 thoughts on “रूबरू (Rubaroo)”
Comments are closed.

Wow uncle!
Vaise to urdu ni aati…pr jitni samjh aayi hum to fan ho gye 🙂
THANKS PUNYA GOD BLESS