रूबरू (Rubaroo)

रूबरू तुम हो एहसास जानलेवा है
छू लिया तुमने, क़यामत हो गयी है

रूबरू तुम हो, एहसास जानलेवा है

शब्-ए-दीदार है हटती नहीं निगाहें
शब्-ए-दीदार है हटती नहीं निगाहें
खो न दें तुम्हें कहीं, पत्थर हो गयी हैं

आपके ख़यालों में गुज़रती हैं शामें
आपके ख़यालों में गुज़रती हैं शामें
ख़्वाब-ओ-तस्सवुर में सुलह हो गयी है

तुम पे आशना हैं मगर डरता है दिल
तुम पे आशना हैं मगर डरता है दिल
अब छुपाए न बने मुश्किल हो गयी है

सर-ए-महफ़िल तलाशतीं है किसको
सर-ए-महफ़िल तलाशतीं है किसको
क्या नज़रें गैर की कायल हो गयी हैं

मेरे अंदाज़ पर यूँ बेबाक हंस देना
मेरे अंदाज़ पर यूँ बेबाक हंस देना
मान भी जाओ मुहब्बत हो गयी है

तुम तुम न रहे रहा मैं भी मैं नहीं
तुम तुम न रहे रहा मैं भी मैं नहीं
तारीख बनने की वजह हो गयी है

रूबरू तुम हो एहसास जानलेवा है
छू लिया तुमने, क़यामत हो गयी है

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