बहुत चर्बी चढ़ी है तुझे(BCCT)

इमामदस्ते ने अदरक से ये कहा—
“बहुत चर्बी चढ़ी है तुझे बेटा, तू गया!
ऐसा ठोकूँगा—सीधा चाय में गिरेगा,
कचूमर बना दूँगा—बस जूस ही बहेगा!”
किस बात का गुरूर? इतनी अकड़ है!
न तू सब्ज़ी, न फल—तेरी जड़ ही जड़ है!
तेरे जैसे कितने आए—सब पर भारी हैं,
जाने कितनों की हमने ली सुपारी है!
खुरच दूँ गोरी चमड़ी गब्बर की तरह,
या मसल दूँ पैरों से ठाकुर की तरह
इलायची को पुकार, लौंग को बुला,
हो जाओ कुर्बान हो खत्म सिलसिला
नाम अपना है इमामदस्ता, सुन थकेले
चाय की बिरादरी के भाई अपुन अकेले

Scroll to Top