मनुआ.. (Manua)

मनुआ बहुत हो चुकी मन की
जा उलझा क्यों प्रीत की लत में
अब झड़ी लगी असुअन की
मनुआ बहुत हो चुकी मन की

मस्त तान कर सो जाते थे
कितने अच्छे वे दिन थे
दोनों साइड उतर जाते थे
बिस्तर के हम किंग थे
अब हो गई ऐसी तैसी
बिसरी सुध तन की

मनुआ बहुत हो चुकी मन की
जा उलझा क्यों प्रीत की लत में
अब झड़ी लगी असुअन की
मनुआ बहुत हो चुकी मन की

कक्षा में अव्वल आते थे
फिसड्डी अब रह गए हैं
मातपिता की आँख के तारे
हड्डी गले की बन गए हैं
कहते थे प्रीत ना करियो
एक ना मानी उनकी

मनुआ बहुत हो चुकी मन की
जा उलझा क्यों प्रीत की लत में
अब झड़ी लगी असुअन की
मनुआ बहुत हो चुकी मन की

डॉक्टर तो नहीं बनना था
हम मरीज़ पर हो गए हैं
भूले तेरे लफड़े में
क्या चीज हम हो गए हैं
टूटी टांग गिर पड़ा भालू
हम हो गए सनकी

मनुआ बहुत हो चुकी मन की
जा उलझा क्यों प्रीत की लत में
अब झड़ी लगी असुअन की
मनुआ बहुत हो चुकी मन की

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