दूध दही किवालिटी वाल्स आइसक्रीम
सच में नहीं बस एक बोर्ड पर लिखे हुए
एक सरदार..
प्लास्टिक के घोड़े पर बैठी एक बच्ची
कल्पना में सात समन्दरों को लांघती
पानी की मोटर निहारती एक महिला
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ देता
छुटभैये की फोटो के साथ लगा बोर्ड
एक कुत्ता, पांच लोगों की एक टोली
और ढीले हाथों से राम राम करके
शामिल होता हुआ टोली में आदमी
तीन सुस्ती झाड़ते हुआ कुत्ते और
एक गिलहरी पेट की आग बुझाते
रात भर की चलने की थकान से
अजीब शोर से चलती एक मशीन
सब्जीवाले की गुहार ताजी सब्जी
लेने के लिए, कोयल की कूक और
पार्क में दाना चुगते जंगली कबूतर
दो आंटी उल्टा लेटकर धरती को
पाताल तक पहुँचाने की ज़िद लिए
अपना ही मोबाइल, एक हाथ से
छीन दूसरे हाथ में लेकर भागते
अंकल
एहसास कराते हैं मुझे ये हर पल
तुम नहीं हो, नहीं हो, कहीं, नहीं हो
कम्बख्त ये दिल फिर भी कहता है
तुम यहीं हो यहीं हो यहीं कहीं हो
वरना तुम होती तो यह खुशनुमा
मौसम मुझे अच्छा लगता फूलों की
ताज़ा महक मेरा दिल लुभा लेती
सुंदरता तो बस तुम्हारी ही देखता
हाथों को थाम लेता जिनमें मेंहदी
लगी होती गिलहरी, कोयल कुत्ते
मैं क्यों देखता इतनी फुर्सत होती?
तुम होतीं तो ऐसा होता
तुम होतीं तो वैसा होता
तुम उस बात पर कितना हंसती
तुम इस बात पर कितनी हैरां होती
मजबूर ये हालात, इधर भी है उधर भी
अकेलेपन की रात, इधर भी है उधर भी
कहने को बहुत कुछ है, मगर किससे कहें
कितनी देर तक यूं ही खामोश रहें, सहें
दिल कहता है दीवार जो दोनों में है आज
गिरा दें, क्यों दिल में हम जलते रहें
लोगों को बता दें, हाँ हमें मोहब्बत है,
मोहब्बत है, मोहब्बत है
