तेरी मोहब्बत के चंद फूल रखे थे हमने किताबों में
खिल जाते हैं फिर जब चले आते हो तुम ख़्वाबों में
आज तेरी उल्फत के मैं गोया दाम लगा आया हूँ
कबाड़ी को मैं वो किताबें रद्दी में बेच आया हूँ
एक तस्वीर तेरी रखी थी हमने बंद अलमारी में
और कुछ खत जो लिखे थे इश्क़ की बीमारी में
हर बीमारी की जड़ मैं आज काट कर आया हूँ
उस अलमारी को ही आज आग दिखा आया हूँ
घर में सुनाई देती थी तेरी बेबाक खिलखिलाहट
चप्पे चप्पे में बसी हुई थी तेरे क़दमों की आहट
तेरी याद दिलाये हर शै से मैं तौबा कर आया हूँ
मैं वो घर ही सनम कौड़ियों के दाम बेच आया हूँ
तेरी मोहब्बत के चंद फूल रखे थे हमने किताबों में
खिल जाते हैं फिर जब चले आते हो तुम ख़्वाबों में
तेरी याद दिलाये हर शै से मैं तौबा कर आया हूँ
तेरी याद न आये मुझे मैं वो शहर छोड़ आया हूँ
