बातों बातों में ही बातें बन गयीं
बातें मुलाकातों में बदल गयीं
ख़्वाबों में रातें जो बीती थीं
हकीकत बन रूबरू हो गयीं
बातों के सिलसिले अब चलते रहे
मुलाकातें फिर मिलने को तरसें
बात फिर एक दिन यूँ भी बनेगी
जब घर में उनकी आमद होगी
बातों का जादू ऐसा चल गया है
जीवन में कोई रंग भर गया है
थोड़ी सी हँसी थोड़ी मौज़ मस्ती
जीवन में बात है अब कुछ नयी
उनकी गली में यूँ तो हम फिरते रहे
मौसम भी खुशगवार लगते रहें
सोचा ना था बात ऐसे बन जाएगी
दिलकश शाम खुशियां बिखरायेगी
बातों बातों में बात यहाँ ले आये हैं
वो तो नहीं उनके वालिद घर आये हैं
रफ्ता रफ्ता बात बन ही जायेगी
मिलन की रात अब आ ही जायेगी
