उसने कहा, “सुनो”

उसने कहा
“सुनो”
मैंने गौर नहीं किया
उसने फिर कहा
“सुनो”
मैंने कहा “क्या है”
“सुनो”

“हाँ हाँ
सुन तो रहा हूँ
बोलो भी”

“मैं बता रहा हूँ, मैं सुनो हूँ”
“अरे हिंदी नहीं आती क्या?”

“सुनो हूँ, नहीं!
“सुनता हूँ होता है”
“मैं सुनता हूँ”
“वो तो तुम होगे
मैं सुनो हूँ”

“तो मैं क्या करूँ?”
“कुछ सुन लो
कुछ कह दो
दिल में जो भी है
दुख दर्द तकलीफ नहीं तो
खुशी बाँट लो
मगर दिल में मत रखो, चलो “

दुख दर्द तकलीफ मुझसे
बाँट लो
मगर दिल में मत रखो

सुनो
मैं तुम्हारे साथ हूँ
सुनो
मैं यहीं पास हूँ

सुनो
मैं तुम्हारे साथ हूँ
कुछ कह दो
मुझसे दर्द बाँट लो

मुझे पता है
तुम खाली हो
मगर दिल भरा है
इंसान को इंसानों ने जो दिया
वो जो कचरा भीतर भरा है
उसके नीचे
वो कातिल मुस्कान कहीं दब गई है

मुझे दिखा दो
गुनगुना लो कुछ
मैं हूँ सुनो
मैं हूँ सुनो

आज की विडम्बना यही है
बाबू मोशाय
बोलते सब हैं

हर बस कहना चाहता है
मगर सुनता कोई नहीं
और न सुनना चाहता है

दुख दर्द तकलीफ मुझसे
बाँट लो
मगर दिल में मत रखो

सुनो
मैं तुम्हारे साथ हूँ
सुनो
मैं यहीं पास हूँ

सुनो
मैं तुम्हारे साथ हूँ
कुछ कह दो
मैं सुन रहा हूँ

इसलिए जब कभी
माँ या पिता जैसा कोई
धैर्य से सुनने वाला मिल जाए

तो उसे सुनो
कह देना
उसके कंधे पे
हाथ रख दिलासा देना

थोड़ा रुको
थोड़ा बोलो
मुझसे अपना
दिल खोलो

जो टूटा है
उसे जोड़ेंगे
जो भी दबा है
वो खोदेंगे

तेरी आवाज़
मेरी आवाज़
तुम्हारे दिल में
बस जगह चाहिए

सुनो
मैं तुम्हारे साथ हूँ
सुनो
मैं यहीं पास हूँ

सुनो
मैं तुम्हारे साथ हूँ
कुछ कह दो
मैं सुन रहा हूँ

सुनो
मैं तुम्हारे साथ हूँ
सुनो
मैं यहीं पास हूँ

सुनो
मैं तुम्हारे साथ हूँ
कह देना
मैं सुन रहा हूँ

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