मैं हूँ जैकी डॉसन
टाइटैनिक फ़िल्म में
मुझे आपने समंदर में डूबते हुए तो देखा होगा
मुझे देखकर
आपकी गलतफ़हमी दूर हो गई होगी
कि अंग्रेज़ गरीब नहीं होते
और केवल चंदू, रामू, दीपू ही
गरीब होते हैं
मेरी ज़िंदगी भी क्या गुज़री
किसी ग़रीब बस्ती से
सड़कछाप कलाकार
आलीशान जहाज़ में चढ़ जाता है
रोज़ मिली मुझे
किसी बदनसीबी की तरह
जिसकी वजह से लांछन लगते थे
मुझ पर हर रोज़
कुछ आंटी-अंकलों की दया के अलावा
सबकी आँखों का काँटा बनकर मैं रहा
मैं वही हूँ
जो डूब के भी बचा रहा
टाइटैनिक
जो टूट के भी खड़ा रहा
इश्क़ के दरिया में
मैंने ज़िंदगी झोंक दी
मेरी आख़िरी धरोहर
मेरी औक़ात रही
रोज़ मुझे
मिलकर भी मिली नहीं
तेरे इश्क़ के सफर में
मैंने हँसते-हँसते
अपनी खुशी को भी
कई बार दफ़्न किया
इश्क़ ने नहीं
समंदर ने नहीं
लोगों ने मुझे डुबोया था
और मेरी साँसों पे
एक नाम छपा रहा
जिसके साथ मैं डूबा
रोज़ मिली मुझे
किसी बदनसीबी की तरह
जिसकी वजह से लांछन लगते थे
मुझ पर हर रोज़
कुछ आंटी-अंकलों की दया के अलावा
सबकी आँखों का काँटा बनकर मैं रहा
मैं वही हूँ
जो डूब के भी बचा रहा
टाइटैनिक
जो टूट के भी खड़ा रहा
इश्क़ के दरिया में
मैंने ज़िंदगी झोंक दी
मेरी आख़िरी धरोहर
मेरी औक़ात रही
आखिरी वक़्त
मैं बना तेरा सहारा
और मेरी जायदाद रही
टूटे जहाज़ का फट्टा
जिसपे मैंने जान दी
थी मेरी कहानी वही
मैं वही हूँ
जो डूब के भी बचा रहा
टाइटैनिक
जो टूट के भी खड़ा रहा
इश्क़ के दरिया में
मैंने ज़िंदगी झोंक दी
मेरी आख़िरी धरोहर
मेरी औक़ात रही
