कोहराम(Kohraam)

कभी कभी मज़बूरी इतनी बढ़ जाती है
कि ज़िन्दगी छोटी पड़ जाती है
शहर के शोरगुल से दूर कहीं
खामोशी कोहराम मचाती है

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