हम-तुम (Ham-Tum)

हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसे
कुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफर
चाहत के बाग हुए वीरां ना ही मिले ना दूर हुए
हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसे
कुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफर

दिल के रास्ते पर कदम चल ना सके
कौन सुनता प्यासी रूहों की पुकार
उम्र से भी लंबे फासले हैं दरमियान
जुड़ सके ना धागे हुए दामन दागदार

हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसे
कुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफर
चाहत के बाग हुए वीरां ना हम मिले ना दूर हुए

हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसे
कुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफर

रेशमी धागों से बुनते थे कभी जो ख्वाब
तिनकों से बिखर गए वो होके तार-तार
दूर तक नजरों में हैं अब हैं बस फासले
साथ चलने में कितने बेबस हैं हम आज

हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसे
कुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफर

पटरियों की तरह फासले चलते रहे
रंग जिंदगी के यूँ बनते बिगड़ते रहे
सफर खत्म होने को है, इंतज़ार तेरा है
आंखें पथरा गई हैं, आरजू थक गई है

हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसे
कुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफर
चाहत के बाग हुए वीरां ना ही मिले ना दूर हुए
हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसे
कुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफर

Scroll to Top