तुमने तो कुछ कहा नहीं, नजरें बयां कर गईं।
इतनी सुंदर हैं कि मेरी नजरें देखती रह गईं।
तुमने तो झुकाली हैं मेरी तौ मगर ठहर गईं।
बला खूबसूरत तुम्हारे चेहरे पर फिसल गईं।
मोबाइल पर खेलती इन उंगलियों की तौबा है।
जैसे दिल बेचैन मेरा ठीक वैसे मचल रही हैं।
तुम्हें देखकर लगता है जैसे पहचान की हो।
मगर मुझे लगता है जैसे हसीन सपने सी हो।
एक पल की मुलाकात, अब तुम्हें क्या मैं कहूं।
दिल चाहता है की बस तुम्हें यूं ही देखता रहूँ।
मिलना और बिछड़ना भाग्य नसीबों का खेल है।
कल की कल सोचेंगे कि हम पास हैं या फेल हैं।
