काय हो गया रे पगली, कायकू हँसतेच जा रई?
कान में इयरपीस डालको बातां बनाये जा रई?
कुछ सुन रई, कुछ उसको सुनाए जा रई,
जिंदगी जोक लगरी क्या, हँसतेच जा रई?
तेरेकू भी मालूम वो सीरियस-वीरियस नईं है,
तू भी उसको डार्लिंग बोलके चूना लगाए जा रई!
मेट्रो सिटी में सपने तितली बन उड़ते रे,
अपुन लोग फ़ालतू उनके पीछे भगते रे।
दिल्ली शहर का येच दस्तूर निभाए जा रई?
फिक्शन की तितली के पीछे भागतीच जा रई!
हकीकत में जल्दी तुमकू ऑफिस पहुँचने का है,
बॉस का सड़ा मुँह स्माइल मारकू देखने का है।
घर में छोटी बात पे झगड़ा करके आई रे,
लड़के वाले आए थे, अब तक तमतमाई रे।
टिफिन बैग में डाली कि घर पेइच भूल आई रे?
जो भी हो, ऑफिस में पूरा दिन काटने का है।
शाम को फिर साला गर्दी में कबाब होने का है।
ओहो! सिल्ली बातां से दिल बहलाए जा रई,
अब समझ आया कायकू दांतां दिखाए जा रई।
खोखली हँसी रे बाबा, खुलकूं हँसने नईं देती जी,
खिसियानी हँसी दिल से निकलतीच नईं जी!
In Hindi
क्या हो गया है पगली तू क्यों हँसे जा रही है
कान में आला फंसा किससे बात बना रही है
कुछ सुनती है तू कुछ तू उसको सुना रही है
जोक लग रही है न जिंदगी हँसते जा रही है
तुझे भी यह पता है कि सीरियस वो नहीं है
तू भी तो उसे डार्लिग गच्चा दिए जा रही है
मेट्रो सिटी में सपने सब तितली बन उड़ते हैं
हम खामख़ाह ही उनके पीछे भगते रहते हैं
दिल्ली शहर का, क्यों!, दस्तूर निभा रही है
फिक्शन की तितली के पीछे भगी जा रही है
हक़ीक़त ये है जल्दी तुझें ऑफिस पहुँचना है
बॉस का सड़ा मुँह स्माइल देते हुए देखना है
घर में छोटी सी बात पर तू लड़ कर आयी है
लड़के वाले आये थे तू अब तक तमतमाई है
टिफिन देख बैग में है, या भूल घर आयी है
जो भी हो ऑफिस में दिन तो गुज़ारना ही है
शाम को फिर से भीड़ के भाड़ में भुंजना है
ओहो ! सिल्ली बातों से तू मन बहला रही है
अब समझ आया तू क्यों खिलखिला रही है
खोखली हँसी ठीक से हँसने भी नहीं देती है
खिसियानी होती है दिल से कहाँ निकलती है
