प्रहरी (Prahari)

सरहद नहीं आँचल है मातृभूमि  का
पवित्र श्वेत सौम्य टुकड़ा यह पृथ्वी का

मेरे कन्धों पर बन्दूक है ज़िम्मेवारी
माँ की लाज न छूने पाये अत्याचारी
मिला अवसर तो पड़ूँगा दस पर भारी
वतन की खातिर एक एक सांस हमारी
मैं हूँ वीर सपूत लाल इस धरती का

सरहद नहीं आँचल यह मातृभूमि  का
श्वेत सौम्य पवित्र टुकड़ा यह पृथ्वी का

यूँ तो पग पग पर यहाँ पुण्य स्थान हैं
जिन्हें सुबह औ शाम पूजता जहान है
मेरा तो कर्त्तव्य ही मेरा भगवान है
जान से प्यारा मुझे हिन्दोस्तान है
मांगेगी बलि तो सर होगा प्रहरी का

सरहद नहीं आँचल यह मातृभूमि  का
श्वेत सौम्य पवित्र टुकड़ा यह पृथ्वी का

मैं चौकस हूँ तुम सो जाओ देशवालो
अमन-ओ-सुकून का मजा लो मतवालों
तिरंगे की रखो शान ‘जय हिन्द’ की बोलो
वतन की सरहदों की रक्षा में तत्पर होलो
छलनी हो न जाए सीना भारत भूमि का

सरहद नहीं आँचल यह मातृभूमि  का
श्वेत सौम्य पवित्र टुकड़ा यह पृथ्वी का

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