बे-मतलब जिंदगी लगे

न तेरी सोहबत में दिल लगे न तेरे बगैर ही
न तू अपना सा लगे और न लगे गैर ही
ये कौन सा दयार है हर शख्स अजनबी लगे
एक तुम क्या गए, बे-मतलब जिंदगी लगे
लोगों को बातें अपनी लगे बिन सर-पैर की

टंकी भर जाती है पानी बहता रहता है
हम खोए रहते हैं दिल बेचैन सा रहता है
ये कौन सा दयार है हमें फर्क ही न पड़े
न खबर तुम्हारी है और न ही गैर की

न तेरी सोहबत में दिल लगे न तेरे बगैर ही
न तू अपना सा लगे और न लगे गैर ही
ये कौन सा दयार है हर शख्स अजनबी लगे
एक तुम क्या गए, बे-मतलब जिंदगी लगे
लोगों को बातें अपनी लगे बिन सर-पैर की

लोगों से मिलना मिलाना अब छूट गया
दिल पत्थर बन गया है भूल गया टूटना
ये कौन सा दयार है ज़ख्म दुखते नहीं
न एहसास है दर्द का न दवा का होश ही

न तेरी सोहबत में दिल लगे न तेरे बगैर ही
न तू अपना सा लगे और न लगे गैर ही
ये कौन सा दयार है हर शख्स अजनबी लगे
एक तुम क्या गए, बे-मतलब जिंदगी लगे
लोगों को बातें अपनी लगे बिन सर-पैर की

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