पब्लिक प्लेस में जब भी जाए गुटखा न थूके धुआं न उड़ाए
नशे की अगर बास न छोड़े
समझ लेना वो मर्द नहीं है क्योंकि मर्द को होता दर्द नहीं है
लाल बत्ती पर दुनिया रूकती ‘ठहरिये’ ज़ेब्रा लाइन कहती
पीछे से हॉर्न पे हॉर्न न बजाये
समझ लेना वो मर्द नहीं है क्योंकि मर्द को होता दर्द नहीं है
चार लोगों में ऊंचा न चिल्लाये सुने नहीं बस बकता न जाए
ज्ञान की ढपली फाड़ता न जाए
समझ लेना वो मर्द नहीं है क्योंकि मर्द को होता दर्द नहीं है
शान से जिए धन खुब कमाए बड़ी गाडी में दिलवाला जाए
सड़क पे कचरा फेंकता न जाए
समझ लेना वो मर्द नहीं है क्योंकि मर्द को होता दर्द नहीं है
पराये सुख में खुश हो जाए फटे में किसी के टांग न फसाये
गाली में माँ बहन याद न दिलाये
समझ लेना वो मर्द नहीं है क्योंकि मर्द को होता दर्द नहीं है
दिल्ली वालों का रॉब होता है गाड़ी भगाने का स्वैग होता है
खुद मार टक्कर घूरता न जाए
समझ लेना वो मर्द नहीं है क्योंकि मर्द को होता दर्द नहीं है
वीकेंड पे मूड न बनाये तीर की तरह वापिस घर आ जाए
बीवी से अच्छे से पेश आये
समझ लेना वो मर्द नहीं है क्योंकि मर्द को होता दर्द नहीं है
Balta mo pabi badir na hamke
Lagte hota hai lagtiyo na hamke
Lo dil ki nishaam ka nuvaay-baay
समझ लेना वो मर्द नहीं है क्योंकि
मर्द को होता दर्द नहीं है
