ज़िन्दगी वैसे हर कदम सिखाती है
याद स्कूल की अब भी लुभाती है
बचपन के दिन मोड़ ले आती है
याद स्कूल की जब जब आती हैसरकारी स्कूल के लम्बे गलियारे
प्लेग्राउंड वो क्लास रूम हमारे
प्रिंसिपल केबिन प्लेग्राउंड कैंटीन
साल गुज़ारे जहाँ कई बेहतरीन
पीछे की बेंच पर दोस्तों से झगड़ा
खींचातान पेन पेन्सिल का रगड़ा
बिना बात कक्षा में शोरगुल करना
ब्लैकबोर्ड पर रोज़ कुछ लिख देना
रिसेस बेल होते ही बाहर लपकना
डोसे चाट पकोड़ी का चट करना
ठेलेवाले भैया को बातों में लगाना
उनका पैसे हमसे लेना भूल जाना
किताबों को नयी ताज़ा रखते थे
पढ़े कोई और हम कम पढ़ते थे
होमवर्क जैसे आफत लगती थी
एग्जाम में साँसें अटकी रहती थीबुक मैथ की अब तक डराती है
याद स्कूल की अब भी लुभाती है
बचपन के दिन मोड़ ले आती है
याद स्कूल की जब जब आती हैकिस्सा बताता हूँ क्लास चलती थी
खिड़की से एक कन्या दिखती थी
हम बच्चे खिड़की से झाँका करते
टीचर से बाद में पनिशमेंट लेते
बातें वो दिल को सुकूं दे जाती हैं
याद स्कूल की अब भी लुभाती है
बचपन के दिन मोड़ ले आती है
याद स्कूल की जब जब आती हैगिरकर उठते हैं उठकर चलते हैं
दौड़ते हैं हम गिरकर सँभलते हैं
चालाक हैं चतुर कुछ सच्चे हैं
सरकारी स्कूलों के जो बच्चे हैं
संघर्ष हमको स्कूल ने सिखाया है
सीखा है जो भी स्कूल से पाया है
पॉकेट में ज़्यादा मनी आती है
याद स्कूल की अब भी लुभाती हैज़िन्दगी वैसे हर कदम सिखाती है
याद स्कूल की अब भी लुभाती है
बचपन के दिन मोड़ ले आती है
याद स्कूल की जब जब आती है
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