इंसानियत का बुलडोज़र…

चापलूस (Chaaploos)

तारीफों के पुल पर मुझको कितना रोज़ चढ़ाते होपरिचय मुझसे मेरा तुम हर दिन नया कराते होसुध बुध खो जाती […]