जीवन की जब राह चुनी एक राह तब छोड़ी थी
दोराहे पर खड़े हुए हुए एक राह चुनी एक छोड़ी थीअर्थशास्त्र में तो हम लाभ हानि तय कर पाते हैं
जीवनशास्त्र में पर किंकर्तव्यविमूढ़ रह जाते हैजीवनपथ में लोग मिले कुछ मित्र चुने हमसफ़र चुने
उनसे जुड़कर रिश्तों के नए बंधन हमने और बुनेचुनते चुनते बुनते बुनते यह जीवन चक्र पलटता है
पहले बचपन यौवन फिर वृद्धावस्था में ढलता हैक्या होता वे मिल जाते जो मित्र हमसफ़र नहीं चुने
रिश्ते जो हमसे छूट गए बंधन जो हमने नहीं बुनेजीवन शायद बेहतर होता मन मफ़िक रिश्ते होते
पल नफरत के कुछ कम सच से न अलग सपने होतेसपनों में खुशियां पलती सच्चाई संघर्ष का साया
राही पूछे बोलो मैंने क्या पाया क्या और गंवाया
क्या ठहरी opportunity cost?