अतिथि Go..अब!

अतिथि कब जाओगे
अतिथि कब जाओगे
क्यों खुर जमा लिए हैं
नहीं तेरा ये ठिकाना
अतिथि कब जाओगे
अतिथि कब जाओगे

हम निस दिन बाबू सोच रहे हैं
याद दिलाएं तुमको है जाना
पर इतने शातिर हो ब्रो
बना देते हो रोज़ बहाना
वन BHK में हम रहते
वन BHK में हम रहते
अंगद न बन जाओ रे

अतिथि कब जाओगे
अतिथि कब जाओगे
क्यों खुर जमा लिए हैं
नहीं तेरा ये ठिकाना
अतिथि कब जाओगे
अतिथि कब जाओगे

रोज नए पकवान बनाते
पड़े पड़े तुम चट कर जाते
शाही पनीर, भिंडी , तोरई
खिचड़ी भी सपोट जाते
राशन के वांदे होगये हैं
राशन के वांदे होगये हैं
अब रहम खाओ रे

अतिथि कब जाओगे
अतिथि कब जाओगे
क्यों खुर जमा लिए हैं
नहीं तेरा ये ठिकाना
अतिथि कब जाओगे
अतिथि कब जाओगे

काम था कोई जो आए तुम
पूरा होगा कब वो हाय
बुद्धि अपनी खो बैठे हैं
अनहोनी न हो जाए
व्यथा हमारी ध्यान धरो
तशरीफ़ ले जाओ रे

अतिथि कब जाओगे
अतिथि कब जाओगे
क्यों खुर जमा लिए हैं
नहीं तेरा ये ठिकाना
अतिथि कब जाओगे
अतिथि कब जाओगे

हिंट दो कब जाओगे…
अतिथि कब जाओगे

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