ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
तू ही तपस्या तू ही
तीर्थ चारों धाम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
बच्चे की सी मुस्कान कभी हंस देती है
कभी खिलोनों की ज़िद में रो देती है
कभी मान जाती कभी रूठ जाती है
तुझे देख दिल को सुकूं
मिलता है आराम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
तू ही तपस्या तू ही
तीर्थ चारों धाम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
तू ऐसी कोमल छूने से भी मुरझाती है
कभी चट्टानों का सीना चीर झाँकती है
जहां हमारी सोच नहीं कर लेती है इंतज़ाम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
तू ही तपस्या तू ही
तीर्थ चारों धाम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
तू बेताल के जैसी पीछे भागो तो उड़ जाए
कभी बैठ काँधे पर अनबुझे सवाल उठाए
तेरे लिए फर्क नहीं राजा, मुफलिस नाकाम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
तू ही तपस्या तू ही
तीर्थ चारों धाम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
ज़िंदगी है बुलडोज़र चाल धीमी पहिये भारी
कोई नहीं चलाता मगर चलती भरी सवारी
रात दिन चौबिसों घंटे क्या सुबह क्या शाम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
तू ही तपस्या तू ही
तीर्थ चारों धाम
ज़िंदगी तुझे सलाम
नमामि सलाम प्रणाम
