वाह भाई वाह (WBW)

भाई, कल दिल्ली कि गर्मी में तूफ़ान ने ऐसी एंट्री मारी,
जैसे मोहल्ले की दो आंटियाँ बाल्टी लेकर आमने-सामने आ गई हों!

ये दिया रख के भाई, मज़ा आ गया,
खुल्ले में सबके सामने तमाशा कर दिया।
सिपाही ठोकता है जैसे चोर को,
पिछवाड़े को लाल कर-कर दिया।
गर्मी को तूफ़ान ने देखो चित किया,
तेज़ आँधी ने मोर्चा संभाला,
दिल्ली की गर्मी का कचूमर निकाला!

देखो कैसे गर्मी की शामत आई,
तेज़ हवा चली, पहले धूल उड़ाई।
पानी के छींटे, संग ओलों के थपेड़े,
ऐसा लगा मैं देख रहा हूँ,
मोहल्ले की दो आंटियों के झगड़े!

ओलों ने मेट्रो रेल को रोक दिया,
माँ जैसे बच्चे का मुँह धुलवा दिया।
भाई जी कतई रोल्ला मचा दिया,
वाह भई, वाह भई, वाह भाई वाह!

एक मिनट में पुलिस, एम्बुलेंस,
यहाँ तक कि फायर का नंबर,
यूँ ही खड़े-खड़े बजवा दिया!
किसी ने पूछा, “भाई हुआ क्या?”
मैं बोला, “मौसम है साहब—दिल्ली में ट्रेलर दिखा दिया!”

भाई जी ने कतई रोल्ला मचा दिया,
वाह भई, वाह भई, वाह भाई वाह!
गर्मी बोली, “मैं तो गई मैया,”
आँधी बोली, “अब मेरी बारी आई!”
वाह भई, वाह भई, वाह भाई वाह!

छाता लेकर निकले थे धूप से बचने,
वापस आए तो छाते से ही पानी टपक रहा था!

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