चार लोग कौन(CLK)

चार लोग कौन? ईन, बीन और फत्ते,
इक्के-दुक्के, तिक्के-चौके, पंजे-छक्के-सत्ते-अट्ठे!

ये चार लोग वो हैं, जिनको दुनिया खोज रही है,
सदियाँ बीत गईं, पर इनकी चर्चा चल रही है।
ये चार लोग वो हैं, जो ख़ुद कुछ नहीं समझते,
पर मोहल्ले के हर काम में टाँग अड़ाते फिरते।

चार लोग कौन? ईन, बीन और फत्ते,
इक्के-दुक्के, तिक्के-चौके, पंजे-छक्के-सत्ते-अट्ठे!

“चार लोग क्या कहेंगे?” आंटी कहती हैं,
इनके नाम से सबकी खुजली करती हैं।
इन चारों के फ़ैसले की धमकी देती हैं,
अपने घर इन चारों से नहीं संभलते हैं,
फ़ैसले औरों के घर जाकर करते फिरते हैं।

चार लोग कौन? ईन, बीन और फत्ते,
इक्के-दुक्के, तिक्के-चौके, पंजे-छक्के-सत्ते-अट्ठे!

वो बात तो ठीक है भाई, ये तो हम भी समझते,
चार लोग हर मसले में टाँग अड़ाया करते।
समाज सुधर जाता, जो ये चार लोग नहीं होते,
पर ईन, बीन और फत्ते—ये तो बस तीन ही होते!
चौथा कहाँ गया, ब्रो?
ये कन्फ्यूज़न तो दूर कर दे!

सही पकड़े, भाई!

चार लोग कौन? ईन, बीन और फत्ते,
इक्के-दुक्के, तिक्के-चौके, पंजे-छक्के-सत्ते-अट्ठे!

चौथे की जगह खाली है भाई,
ख़ुद को गिन ले।

चार लोग कौन? ईन, बीन और फत्ते,
इक्के-दुक्के, तिक्के-चौके, पंजे-छक्के-सत्ते-अट्ठे!

चौथे की जगह खाली है भाई,
ख़ुद को गिन ले।

चार लोग कौन? ईन, बीन और फत्ते,
इक्के-दुक्के, तिक्के-चौके, पंजे-छक्के-सत्ते-अट्ठे!

ख़ुद को गिन ले!

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