[Intro]
[Melodic acoustic guitar strumming, slow soulful bansuri flute solo]
[Verse 1]
मैं बाहर की दुनिया में खोजा करता था
कोई अक्सर भीतर से हाथ हिलाता था
मैंने सीखा था बाहर दोस्त हैं, रिश्ते हैं
अपने हैं जो मेरा ख्याल रख सकते हैं
[Pre-Chorus]
[Soft tabla rhythm enters quietly]
मेरे भीतर से पर कोई इशारा देता था
एक झरोखे से मुझे करीब बुलाता था
[Chorus]
[Soaring emotional melody, warm string pads]
हर वक्त रहता था तैयार वो मेरे लिए
प्यार दिखाता था जब होता था आहत
मेरे ऐबों में भी वो राह दिखाता ही था
मैं ही उसको अक्सर नकार देता था
[Verse 2]
[Acoustic guitar and flute interlude]
बाहर के रिश्तों से जब मैंने चोट खाई
रफ्ता रफ्ता हकीकत जब नज़र आई
बाहर अपना कोई नहीं, दिल मान गया
मैं मुड़ा, अंदर आहट की ओर हो लिया
[Bridge]
[Tempo slows down slightly, minimalist instrumentation, voice is intimate]
देखा वहीं मौजूद वो मेरे इंतज़ार में था
बहुत देर कर दी! उसने सिर्फ ये कहा
जैसे बरसों से मेरी राह निहार रहा था
उसकी सोहबत में अजब सुकून मिला
[Chorus]
[Full melodic orchestration, deeply passionate and soulful vocals]
आँखें नम थीं, चेहरा खिला हुआ था
बहुत देर करी!… उसने हँसकर कहा
द्वार तो खुले थे! पहले आ गया होता
परेशानी में हर किसी को पुकारा तूने
मैं इस झरोखे से बुलाता रह गया तुझे
[Verse 3]
मैं उलझनों और थपेड़ों से परेशान था
वह मेरे लिए बहुत खुश और हैरान था
उसकी संगत में वाह क्या बरकत थी
बाहर तो सिर्फ धोखा और लालच थी
[Outro]
[Music starts fading, delicate bansuri notes]
ईश्वर था, कान्हा था, या फिर मैं सुदामा…
जो भी हो, फिर लौटने की मुझे कोई चाह न रही
[Soft acoustic guitar fade out]
[End]
