[Verse 1]
सुबह खाकर एक बर्गर
कंधे पे लादे हुए बोझ
चौक से चांदनी चौक तक
बांटा करता हूँ रोज खत
गलीयों में नाम पुकारते
दरवाज़े पे थप-थप हाथ
तेरे नाम का नहीं एक खत
कैसे कहूं दिल की बात
[Pre-Chorus]
लाखों खतों में खो गया
मेरा दिल का सारा हिसाब
हर मोहर, हर पत्ते पे
बस तेरे ही निशान
[Chorus]
कौन सा खत भेजूँ मैं
कौन सा खत
मेरी बात जाए तुझ तक
कौन सा खत भेजूँ मैं
कौन सा खत
जिसमें शामिल दिल का सच
[Verse 2]
पुरानी साइकिल की चेन
और शाम का धुंधला सा रोड
काश्मीरी गेट से लाजपत तक
मुझपे रहता दिन भर का लोड
कोई माँ की दुआ भेजे
कोई भाई का हाल लिखे
और मैं खामोश आस रखूं
काश तेरा नाम भी दिखे
कभी खत में महक लगे
कभी मोड़ पे दिल रुके
मैं सोचूँ, इस ढेर में से
साँस पहले कौन सा ले
[Pre-Chorus]
लाखों खतों में खो गया
मेरा दिल का सारा हिसाब
हर मोहर, हर पत्ते पे
बस तेरे ही निशान
[Chorus]
कौन सा खत भेजूँ मैं
कौन सा खत
मेरी बात जाए तुझ तक
कौन सा खत भेजूँ मैं
कौन सा खत
जिसमें शामिल दिल का सच
[ब्रिज]
आज अगर हाथ हिल जाए
और तेरा घर पहला मिले
मैं एक खाली से खत में
अपना नाम भी दे दूँ
पहली बार जो लिख दूँ
“सुन, मैं यहीं था”
फिर उस सफेद कागज पे
तेरा चेहरा भर दूँ
[फाइनल कोरस]
कौन सा खत भेजूं मैं
कौन सा खत मेरी बात लिखे
तुझ तक कौन सा खत भेजूं
मैं कौन सा खत
जिसमें मेरा दिल हो
सच कौन सा खत भेजूं
मैं कौन सा खत
लाखों में तेरा ही हक
