दो ट्रेनें (DT)

[Verse 1]
तेरी याद का झरोखा
चलती ट्रेन से झाँका
खिड़की के शीशे में
तुम्हारी झलक दिखी
एक पल की दूरी में
कुल उम्र समा गई

वो चाय का एक घूँट
भीगी भीगी सी हँसी
वो पटरियों की दौड़
जो आख़िरी बात सी
मेरे ज़ेहन की मुट्ठी
यादों से भर गई
तेरी एक झलक से
साँसें भी थम गईं

[Pre-Chorus]
रेलगाड़ी चल दी
और दिल रह गया
तुम भी देख रही थी
मैं सोच में टूट गया
हॉर्न सुनकर लगा
वक़्त लौट आएगा
तुम क़रीब आओगी
दिल ख़्वाब सजाएगा

[Chorus]
दो ट्रेनें, दो मंज़िलें
एक ही स्टेशन पे
दो नज़रें फिर मिलीं
जुदा हुईं पल में
दो ट्रेनें, दो सफ़र थे
दिल मगर ठहर गया
तुम फिर छोड़ गई
मैं लुटा सा रह गया

[Verse 2]
तेरी कलाई में बंधा
नीला रबर-बैंड था
तेरे गेसुओं में गुंथा
फूल गुलाब सा था
तूने नज़र जो उठाई
बीते लम्हे लौट आए
पलकों ने सब कह दिया
लब फिर भी चुप रह गए

[Pre-Chorus]
पटरियों की चीख में
गूँजा नाम तुम्हारा
हर गुज़रता हुआ डिब्बा
लेता गया सहारा

[Chorus]
दो ट्रेनें, दो दिशाएँ
एक ही स्टेशन पे
नज़रें मिलीं मगर
जुदा हुईं पल में
दो ट्रेनें, दो सफ़र थे
दिल मगर रुक गया
तुम पीछे चल दी कहीं
मैं यहीं पे रह गया

[Bridge]
ना हाथ ही उठा सके
ना कुछ कह पाए हम
बस शीशों के उस पार
तरसते रह गए हम
एक मोड़ आया फिर
सब धुंधला हो गया
रेलें आगे बढ़ गईं
दिल मगर थम सा गया

[Chorus]
दो ट्रेनें, दो दिशाएँ
एक ही स्टेशन पे
दो दिल मिले मगर
मिलकर भी न मिले
दो ट्रेनें, दो सफ़र थे
क़ुदरत का ही लेखा
तुम अपनी पटरी पर
मैं रह गया देखता

Leave a Comment

Scroll to Top