पापा पत्थर सा खुद को समझते हैं
सारी दुनिया से टकरा जाते हैं
बेटी की एक ख्वाहिश पे मगर
मोम से पिघल जाते हैंघर के बाहर शेर बने रहते हैं
हमारी परवाह में घुले रहते हैं
बेटी की मुस्कान देख कर
मोम से पिघल जाते हैंपापा एंजेल जैसे होते हैं
प्यारे इतने खास होते हैं
बेटी की खुशियों की खातिर
जान बिछाए रहते हैंआँखों में आँसू देख न पाएं
रातों में जागें पास आएं
बेटी के माथे को चूमकर
चादर से ओढ़ा जाएँदुनिया की मुश्किलों से लड़ते
कितना हमारे लिए सहते
दुःख बेटी के पास न फटके
शक्तिमान पापा के रहतेपापा सच में एंजेल हैं
प्यारे इतने खास होते हैं
बेटी की खुशियों की खातिर
जान बिछाए रहते हैंपापा पत्थर सा खुद को समझते हैं
सारी दुनिया से टकरा जाते हैं
बेटी की एक ख्वाहिश पे मगर
मोम से पिघल जाते हैं
