बीत गया मैं वह वक्त नहीं जुबां से निकला शब्द नहीं
कमां से छूटा तीर भी नहीं जो लौटकर न आ पाऊंगा
बुलाओगे तो क्यों न आऊंगाहर युग में तो मैं आया ही हूँ सच्चे मन की पुकार पर
विपत्ति ग्रस्त संसार पर अथवा धर्म पर हुए प्रहार पर
भला मैं कैसे मौन रह पाऊंगा
बुलाओगे तो क्यों न आऊंगा!मैंने रखा सदा मान अतीत में द्रौपदी के क्रंदन का
मीरा के प्रणय बंधन का, विदुर के अभिनन्दन का
पुकार देखो, मैं रह न पाऊंगा
बुलाओगे तो क्यों न आऊंगाप्रीत को पहचानता हूँ, मैं सर्वस्व अपना मानता हूँ
कौन मेरा! है मैं जानता हूँ वचन निश्चय निभाऊंगा
बुलाकर देखो, आ जाऊंगा
बुलाओगे तो क्यों न आऊंगाबीत गया मैं वह वक्त नहीं जुबां से निकला शब्द नहीं
कमां से छूटा तीर भी नहीं जो लौटकर न आ पाऊंगा
बुलाओगे तो क्यों न आऊंगा
ह्रदय से पुकारो, आ जाऊँगा
