बेखुदी (Bekhudi)

तुम्हारे तस्सव्वुर में सराबोर हो जाने की ज़िद की है
फिर एक बार रेत मुठ्ठी में दबाने की कोशिश की है

हमको मालूम है गुज़रा वक़्त लौटकर नहीं आता
मासूम की तरह चाँद छू लेने की हिमाकत की है

वफ़ा तुमने निभाई थी तो बेवफा हम भी नहीं थे
किसने फिर चमन उजाड़ने की साजिश की है

उधर तूफ़ां का कहर इधर मयखाने में डूबे हम
बेखुदी में ही तुम्हें भूल जाने की कोशिश की है

दम निकला जिस दम लबों पर नाम आ ही गया
लाख तेरे नाम पर होंठ सी लेने की कसम ली है

उमड़ आया शहर तमाम जब ज़नाज़ा निकला
तुम्हारे दीदार को आँखो ने फिर हरकत की है

Scroll to Top