मुसाफिर चल अकेले (Musafir Chal Akele)

है सफर वो हसीं जहाँ रेले न झमेले
कोई साथ नहीं मुसाफिर चल अकेले

सामान साथ कोई तेरे न जायेगा
कारवां तमाम यहीं पर रह जायेगा
बंट जायेंगे सब ये तेरे मेले दुमहले
कुछ तेरा नहीं मुसाफिर चल अकेले

नेकी की पोटली अपने साथ रख ले
दुआओं की झोली हाथ में ले ले
अनजाना सफर तुझे जाना दूर है
निकल चल सबका सलाम ले ले
कोई डर नहीं मुसाफिर चल अकेले

अपने कहाँ हैं वो जो छोड़ने आये हैं
आँखों ने जिनकी आंसू छलकाए हैं
हमदम करता है इंतजार उस पार
मिलन होगा शब की रात आयी ले
अब न देर कर मुसाफिर चल अकेले

देस सजन के गोरी अब तुझे जाना है
घर वही है तेरा और वही ठिकाना है
होने को उसकी अब सोलह शृंगार ले
बैठ जा डोली में कहार आ गए लेने
सजन ही थामेंगे मुसाफिर चल अकेले

है सफर वो हसीं जहाँ रेले न झमेले
कोई साथ नहीं मुसाफिर चल अकेले

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