मैडम जी (Madam Ji)
खुले बाल सजी संवरी इत्र की महक फैला गयी हैंसबकी धड़कने तेज़ हो गयीं आँखों के तीर चला गई हैंथाम
खुले बाल सजी संवरी इत्र की महक फैला गयी हैंसबकी धड़कने तेज़ हो गयीं आँखों के तीर चला गई हैंथाम
ऐतवार की शाम ही से मन जो दुश्वार सा लगता हैसोमवार की सुबह से जिसका इंतज़ार सा लगता हैशुक्रवार जब
वक़्त के अंधे कुए में ग़म हुए कुछ दोस्तयादों में बसा करते हैं वो बिछड़े हुए लोगक्या होगा अचानक अगर
जानता हूँ किसी रोज़ मोड़ मुड़ जाऊंगागोया जिस रोज़ भी तुम्हें छोड़ जाऊंगादिलों में उम्मीद एक लगन छोड़ जाऊंगा ज़िन्दगी
यादों के बंद बक्से से निकली पुरानी किताब हैदस्तक पुराने यार ने दी है दिल बाग बाग हैएक उम्र गुज़र
मैं आईना हूँ हमराज़ तेरा मैं भी हूँतू माने न माने इश्क़ तेरा मैं भी हूँ इन आँखों में जब