माफ कर दो
तेरी नफरतों में कुछ युँ गुम हुए हमकि मुहब्बत से ही किनारा कर बैठेपर्दा उठा एक रोज़ इन निगाहों सेतस्सवुर […]
तेरी नफरतों में कुछ युँ गुम हुए हमकि मुहब्बत से ही किनारा कर बैठेपर्दा उठा एक रोज़ इन निगाहों सेतस्सवुर […]
न तेरी सोहबत में दिल लगे न तेरे बगैर हीन तू अपना सा लगे और न लगे गैर हीये कौन
पतझड़ के रंग फिर चढ़ने लगे हैंकपास के फूल पेड़ों से झड़ने लगे हैंएक बार फिर जम के नींद गुदगुदाएगीचिड़िया
दिल के रिश्तों में बेशक खुलूसियत रखनाहमदम से रूठने मनाने का हुनर रखनारूठो अगर तो मान जाने की वजह रखनाआते-जाते
[परिचय][अकोस्टिक गिटार का स्ट्रम, क्लीन इलेक्ट्रिक गिटार प्रमुख धुन] [पद्य 1][पुरुष आवाज में प्रवेश]खाया है धोखा टूटा है दिल बार
तुम कहती हो —WhatsApp है मगर में देखती नहींअक्सर कह देती हो—“मैं तो WhatsApp देखती ही नहीं,”कि जैसे कोई ताज
सुनिए जी ,चलिए एक बोसा हो जाईछोरिये जीआपको जी अपनी पड़ी हैआज कामवाली नहीं आई छुट्टी है छोरिये न कामकरवा
अभी मूड नहीं हैअभी मूड नहीं हैअभी मूड नहीं हैअभी मूड नहीं है सुबह की बारिश गजब घनघोर थीबादलों की
आशिक की नज़र पेकौन सा… कौन सालेंस लगा देता है… देता है…देता हैजो सावन के अंधे को..सब…हरा ही हरा…हरा ही
आसमां की कह गया मैं चाँद तारों की कह गयासमंदरों नदियों और शोख बहारों की कह गयाबारिशों पेड़ पौधों और
वो पहली सी बात अब बाकी नहींतुझमें, मुझमें, जज़्बात अब बाकी नहीं तेरी हँसी में ज़ज़्ब था एक सुकून साहर
किसी राह में किसी मोड़ परनज़र आ तू वीडियो कॉल परदेख लूँ तुझे बस एक घड़ी भरमेरे हमसफर, मेरे हमसफरमेरे
मेरे महबूब ने मुझे प्यार मेंन जाने क्या क्या कह दिया किताब का मुड़ा हुआ पन्नाहाथी के मुंह में फंसा
मैं कोई शायर बदनाम नहींबड़ा मेरा कोई नाम नहींमैंने नहीं लिखी कोईबड़ी बड़ी इबारतेंन बेज़ा बढाए हैं मैंने कदन खींची
बो हम जे कैरए थेसादी करवा दो हमाई इन्ही से सगाई करें हैंखुस रखेंगे सदा, तुमको दिल से दुआई दें
बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसमकोडिंग की फील्ड में ये पहला कदममुश्किलें आएंगी शुरू में मगर जीतेंगे हमकोडिंग
चैट जीपीटी तुमसे प्यार हैमेरे वाला तो बेकार हैमेरी एक नहीं सुनता वोमुझसे करता नहीं प्यार है अपनी अपनी हांकता
कुड़ी लेनी है जी साणु ओही जेड़ी माँ-बापु दी सेवा करेबमार बेचारे रेंदे ने बस दोना दी देखभाल करे चौवी
कभी शिकवा कभी शिकायतकभी किसी बात परतुनक जाती होकभी हँसाती गुदगुदातीकभी रूठती होकभी पिनक जाती होमुझे समझ नहीं आता AIतुम
हाथ धोता हूँ जब दो बर्तन घिस देता हूँकाम इस तरह से मैं मैनेज कर लेता हूँमैं अपने घर में