कौन ले गया (Kon Le gaya)
कौन ले गया लिखने का हुनर मेरातसव्वुर का गहरा समंदर मेरा में नहीं कोई बदनाम शायरन खायी चोट उल्फत में
कौन ले गया लिखने का हुनर मेरातसव्वुर का गहरा समंदर मेरा में नहीं कोई बदनाम शायरन खायी चोट उल्फत में
मतवाला दिल सोचता हैजिस पल होगा अपना मिलनतुम फैलाकर अपना दामनथाम लोगी दिल की धड़कन जब से होश सम्भाला हैतुमसे
सेल्समेन पेशा है मेरा जबसे मैंने तुमको देखादिल तुम पर आया है, पर नियम व शर्तें लागू प्यार तुम्ही से
कभी फुर्सत में जब बैठे सिलसिले पास आ बैठेलौट आये हंसी लम्हेजो बिताये संग यादों के ज़िक्र छेड़ा फिर होले
दिल में दबे जज्बात हैं कितने क्या समझो तुम क्या जानोतुमसे कितने ख्वाब सजे तुम क्या समझो तुम क्या जानो
गए रोज़ खयालात मेरे चुपचाप थेज़िन्दगी के अजीब बड़े हालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे न होश हमें न
गोरी पियाजी के घर को चलीदुनिया किसी की बसाने चलीकितनों के अरमान ढीले हुएटुकड़े दिलों को बनाकर चली गोरी पियाजी
ज़ज़्बात की मेरे अजी बोली न लगाओबाजार में हर चीज़ बिकाऊ नहीं होतीछोड़ दो आदत कि हर शै की है
तन्हाईयों के महल में रहते हैं वो याद बनकरकभी रहते थे दुआओं में जो फ़रियाद बनकर वो था मंज़र फुर्सतों
हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते क्यूँ होअंदाज़ की तल्खी को दबाते क्यूँ होखफा हो तुम जो तो कह दो हमसेयूँ नज़र
कोशिशें तमाम बेकार हुईंजेहन की पशोपेश मगर हार हुईख़्वाबों को बेइंतेहा दौड़ायाहुनर चुन चुन लफ्ज़ ले लायाकोई तक़रीर न उतरी
फलक से तारे लाना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोचाँद पर घर बनाना चाहता हूँ अगर मंज़ूर हो तो तुम्हारे
तुम आये जो करीब मिलते हैं लोग अदब सेहाथों में है हाथ अब डरते हैं सिर्फ रब से अक्सर बिना
घडी भर को सुनो गोरी मेरे पहलू में आनाअपने मम्मी डैडी से ज़रा बच बच के आनातू भी खुद को
क्यों हो खामोश क्यों इतने हैरां होक्यों हो जैसे अजनबी कुछ तो कहोक्या ग़लत हुआ है क्या बदल गया हैकसम
मिलकर भी जैसे न मिला उससेभुलाती नहीं है मुझे याद उसकीआज भी कौंधती है बिजली बनमन में सतरंगी मुस्कान उसकी
सपने जो टूट गए साथी सब छूट गएदिल अपना न रहा कुछ हासिल न रहायादें जो बाकी थी आफत जां
हर दिन नया है सुकूं ही सुकूं हैतेरे सजदे में लगी जब से दिल की लगन रात नयी हैं बात
वस्ल-ए-यार दिल को सुकून आया हैतूने ख़्वाबों को जब से मेरे सजाया हैबयां करूँ क्या तुझे ऐ मेरे हमदमतेरे दम
बाखुदा इल्म है तुम न आओगेनिशाँ क़दमों के समेटने बैठा हूँअचानक छुप गए हो दूर कहींदिल को एहसास दिलाने बैठा