तन्हाई (Tanhaaee)
गए रोज़ खयालात मेरे चुपचाप थेज़िन्दगी के अजीब बड़े हालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे न था होश मुझे […]
गए रोज़ खयालात मेरे चुपचाप थेज़िन्दगी के अजीब बड़े हालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे न था होश मुझे […]
गोरी पियाजी के घर को चलीदुनिया किसी की बसाने चलीकितनों के अरमान ढीले हुएटुकड़े दिलों को बनाकर चली लड़कों के
ज़ज़्बात की मेरे अजी बोली न लगाओबाजार में हर चीज़ बिकाऊ नहीं होतीछोड़ दो आदत कि हर शै की है
तन्हाईयों के महल में रहते हैं वो याद बनकरकभी रहते थे दुआओं में जो फ़रियाद बनकर वो था मंज़र फुर्सतों
हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते क्यूँ होअंदाज़ की तल्खी को दबाते क्यूँ होखफा हो तुम जो तो कह दो हमसेयूँ नज़र
कोशिशें तमाम बेकार हुईंजेहन की पशोपेश मगर हार हुईख़्वाबों को बेइंतेहा दौड़ायाहुनर चुन चुन लफ्ज़ ले लायाकोई तक़रीर न उतरी
फलक से तारे लाना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोचाँद पर घर बनाना चाहता हूँ अगर मंज़ूर हो तो तुम्हारे
तुम आये जो करीब मिलते हैं लोग अदब सेहाथों में है हाथ अब डरते हैं सिर्फ रब से अक्सर बिना
घडी भर को सुनो गोरी मेरे पहलू में आनाअपने मम्मी डैडी से ज़रा बच बच के आनातू भी खुद को
क्यों हो खामोश क्यों इतने हैरां होक्यों हो जैसे अजनबी कुछ तो कहोक्या ग़लत हुआ है क्या बदल गया हैकसम
मिलकर भी जैसे न मिला उससेभुलाती नहीं है मुझे याद उसकीआज भी कौंधती है बिजली बनमन में सतरंगी मुस्कान उसकी
सपने जो टूट गए साथी सब छूट गएदिल अपना न रहा कुछ हासिल न रहायादें जो बाकी थी आफत जां
हर दिन नया है सुकूं ही सुकूं हैतेरे सजदे में लगी जब से दिल की लगन रात नयी हैं बात
वस्ल-ए-यार दिल को सुकून आया हैतूने ख़्वाबों को जब से मेरे सजाया हैबयां करूँ क्या तुझे ऐ मेरे हमदमतेरे दम
बाखुदा इल्म है तुम न आओगेनिशाँ क़दमों के समेटने बैठा हूँअचानक छुप गए हो दूर कहींदिल को एहसास दिलाने बैठा
Days were brightbefore I saw you.Nights were starry,skies wore blue.Alas! Life was wholebefore I saw you. Winters never chilled this
You’re my Wi-Fi darling You’re my Wi-Fi darling,I’m your router dear,I only connect with you —Say yes, don’t fear Say
कवि तेरी कल्पना की ऊंची उड़ानपल में लांघती पर्वत झरने, नदियां, समंदरतालाब, खेत-खलिहान, गगनचुम्बी मकानजाने कितने नगर, ‘गढ़ और ‘बाद’
सुनते हुए मैं कह भी गयाकहते हुए तुम सुन न सकेतुम दिल को मेरे पढ़ न सकेकुछ हम भी खुलकर