ओ डोंगे ओ बर्तन पोंगे
चल तुझे फेंक कर आऊं
में तुझसे पक चुका हूँ
चल ठिकाने लगा आऊं
ओ जीजे तेरी माँ की जय
हाथ लगा के तो दिखा
तेरे दहेज़ का मैं डोंगा हूँ
चाहे बर्तन मैं पोंगा हूँ
ओ डोंगे… बोल..
बढ़िया से बढ़िया डिनर सेट लाकर रख दिया हूं
पर तू ही रोज़ दिखता है सुन मैं पागल हो रिया हूं
ओ डोंगे स्टील के लोंडे
तुझे देख मैं थक गया हूं
चल पीछा तुझसे छुड़ाऊं
सच! में तुझसे ऊब चुका हूँ
ओ जीजे बक..
मुझे छू भो मत लियो तेरे दहेज़ का मैं डोंगा हूँ
मुझे फेंक के तो दिखा खुल्ला चैलेंज कर रिया हूँ
ओ बेढंगे…क्या?
जब से मिला है दहेज साली जान आफत में है
ताना देती रहती बीवी आती रोज़ शामत है
ओ पाखंडे..
तीस साल हो गए तू अभी भी घर में घुसा बैठा है
तुझे देख देख बीपी मेरा ऊपर नीचे हो रिया है
ओ जीजे…
चूहे भीगे…
याद है न एक बार जो तू तकिया फेंक आया था
दीदी ने बिरादरी के आगे तुझे मुर्गा बनाया था
भगवान से नहीं तो बीवी से तो डर, बाज़ आजा
ओ जीजे
सई कहा साले..
मैं तो बाबू इमोशनली बहक गया था
सच भइये में तो मज़ाक कर रिया था
आया न लाइन पे…
मेरे सारे सेट नए चाहे कोरे ही मर जाएंगे
खाना डोंगे स्टील के हम तेरे संग ही खाएंगे
ओ साले…
ओ जीजे…
चुप साले…
हट जीजे…
घिसे डोंगे…
अधेड़ जीजे…
जा मरजा कहीं …
घर तेरे बाप का नहीं..
रजिस्ट्री दीदी के नाम है अंधे
ओ शिट…
