एक दो एक (Ek Doh Ek)
बड़ा अनोखा अंक है दोएक और एक बनाएं दोदो के बीच जो तीजा आयेकिस्सा खत्म हुआ समझो दिन हैं चक्की […]
बड़ा अनोखा अंक है दोएक और एक बनाएं दोदो के बीच जो तीजा आयेकिस्सा खत्म हुआ समझो दिन हैं चक्की […]
सुनो आज ‘एक’ की महिमावृहद् अनोखा इसका ज्ञानअंक नहीं यह केवल ‘एक’गाथा है अत्यंत महान एक है ईश्वर वही साध्य
किस विधि वर्णन करूँ मैं केशव महिमा तेरी को अपारमहा महाभारत के युग में अवतरे तुम बनकर सूत्रधार कौरव वंश और
इस दशहरे दहन करें हम भीतर के रावण काबुद्धि हमारी भ्रष्ट करे अपमान नर नारायण का अपने घर का कूड़ा
बला है यूँ तेरी नज़र का झुक जानाहुए शाम जैसे सूरज का ढल जानाहज़ारों में नहीं तुम एक हो लाखों
तारागण गिरि मेदिनी ससि सूर अरु व्योमसर्व साध विनती सुनो जो कछु सो ‘ओम’! कहा कहत है ‘ओम’ नर ईश्वर
शीशा-ए-दिल इस कदर साफ़ हो जाएकि ज़र्रे ज़र्रे में खुदाया नज़र आये! उम्र भर दीदार को भटका किये हमगली कूचे
आज सुबहआफिस जाते समयअपनी गाड़ी के अंदर से देखाएक आम आदमीऊंची सी साईकिल पर सवारचला जा रहा थासाथ छोटा बच्चाआगे
चल समय के रथ को मोड़ लें अतीत मेंकिताबों का बस्ता और बचपन बुलाता है!रोज़ की इस भगदड़ से बच
मैं खोजता रहा उसकोमंदिरों शिवालयों मेंमस्जिदों गुरुद्वारों मेंमहसूस किया न कियाजब थामा तूने हर बारजब जब मैं गिरा भटकाजीवन की
बढ़ी हुई मुश्किलों केहल जो न निकल सकेहालात न बदल सके‘विधा’ संग न चल सके मिटा भेद अपनों काघुटा दम