अंधे घोड़े(AG)
तमाम घोड़े मुकाबले में दौड़ाए गएअंधे घोड़े ही मगर अव्वल पाए गए शहसवार गिरे सरे मैदां औंधे मुँहअक़लमंद हिनहिनाते ही […]
तमाम घोड़े मुकाबले में दौड़ाए गएअंधे घोड़े ही मगर अव्वल पाए गए शहसवार गिरे सरे मैदां औंधे मुँहअक़लमंद हिनहिनाते ही […]
ज़िंदगी कोमैंने कह दिया—जा सिमरन जा,जा जी ले अपनी ज़िंदगी… ज़िंदगी….ज़िंदगी होमवर्क और किताब बन गई थी,नौकरी की पढ़ाई का
हे देअर!हे यू!हे! आई ऍम टॉकिंग तो यूओह! हेलो अंकल हाउ डू यू डूतुम छोटा मेमना तू हमारा बरबरी करता
सभ्यताएँ वो तबाह हुईंजब सब मिलजुल बैठा करते थे,सुख-दुख में रहते साथघर एक-दूजे के जाया करते थे। शादी-ब्याह, जन्मदिन होया
पुरानी तस्वीर की डीपी लगाए बैठा हूँ,बुढ़ापे से इस तरह मुँह छुपाए बैठा हूँ।जवानी छोड़ गई है दामन कब का,जवाँ
मैं वही हूँ, सब कुछ पहले जैसा हीबस समय बदल गया—अब वैसा नहींवो जादूगर कहीं दफ़न हो गया हैहाथों का
ऐ गांधी तेरी टोपी कहाँ गईखुद पहनते हो न गैर कोईआज दिल में ख़याल आयाखाली मन में शैतान आया अपने
घर में सब लेकिन हम तन्हा और बस हैं दीवारेंशब्द निठल्ले घूमते हैं कोई नहीं जिसे पुकारेंघर हो गया कैदखाना
यह चाहिए मुझे वह भी चाहिएयह मुझे दे दो वह मुझे ही दोइस पर हक मेरा बस मेरा हैक्यों और
दिल की आवाज़ पर लॉक लगा थाजुबां पर उसकी टोक लगा थाजहाँ-जहाँ वह चीखी चिल्लाईजिसको भी आवाज़ लगाईज़ाहिल है तू,
ना! मैं तुमसे कोई बात नहीं करूंगामन के ठहराव पर घात नहीं करूँगाना जाने कौन सी रचना यहां आ बैठेतितली
लम्हे जो चंद मिले हैं तो खुद पर ध्यान दो चलोकांटे हैं चुभे पैरों में ज़रा उनको निकाल चलोसफर सिर्फ
मुकद्दर से ज़्यादामुकद्दर से ज़्यादा, हाँमुकद्दर से ज़्यादा..मुकद्दर से किसी को न ज़्यादा कभी मिला हैबाकी बंदे खुद तेरा फैसला
सभ्यताओं ने सवाल पूछे पीढियों ने चुप करा दियासच को इस तरह हमने खोद कर कब्र दफना दियाहवाला दे दिया
अंतरा 1दादा ऊँचे पद पर थे,दादी के भी जलवे थे।पद दादा का ऊँचा था,कद दादी का ऊंचा था।दादा तो बजर
पब्लिक ने पेड़ों को देवकीऔर खुद को कंस समझ रखा हैखिलते ही फूलों को तोड़ डालते हैं तथाआस्था के नाम
आज खाली बैठा था,हल्की बारिश का मौसम था,हँसी ख्वाब देखने का मन था। सर्फिंग करते-करते मेरीएक वेबसाइट पर नज़र गई।कुछ
चल विक्रम एक सवाल बताये जो है अपना सोशल मीडियाएक किसी ने गाया भजनभक्ति में होकर के मगनयूट्यूब पर उसको