मकान और मुकाम
शहरवाले मकान का एक हिस्सा बेचकरदादाजी ने नया ऊँचा मकान और मुकाम हासिल कियाहाँ, उनको दुख भी हुआ, दिल पर […]
शहरवाले मकान का एक हिस्सा बेचकरदादाजी ने नया ऊँचा मकान और मुकाम हासिल कियाहाँ, उनको दुख भी हुआ, दिल पर […]
मैं जानता हूँ कि मैं पत्थर हूँतुम्हारे छूने से भगवान् बना हूँतुम्हारे लिए मैं पूज्य सहीमगर जब पत्थर बनूँ तो
मैं समय हूँ…ना रुका हूँ, ना थमा हूँऔर जब सब कुछ शून्य था… तब भी मैं था इस ब्रह्मांड मेंअगर
जड़ था मैं उसके लिए एक पत्थर की मूर्त सा थापार्क में बैठे बैठे मैं अपनी चिंता में चिंतित थाएक
राधा की बूनी में, नीबू की धारामन के मोर ने, पंख पसारानाचा क्यों रे बावरा मन हमारारस की रेखा, रंग
गर्मी इस कदर पड़ीकि पानी को पसीना आयापानी उड़ चला आसमां मेंगर्मी से हुआ बौखलायाक्या गर्मी है पानी चिल्लायाहवा से
चन्दा है तू, ऐ बापू मेरे तू,जब तक दौलत कमाता है तूओ मेरी आँखों का तारा है तूचन्दा है तू,
ज़िन्दगी क्याएक फुग्गा!हवा हो कमपिचक जाएगीहवा भरेगीफूल जाएगीटेढ़ी होगीमेढ़ी होगीगुदगुदाएगीखिलखिलाएगीहोगी फूलकर कुप्पाज़िन्दगी क्याएक फुग्गा! झूम ख़ुशी मेंऊपर जाएगीनीचे आएगीफिर ख्वामखां
गर्मी में झुलस जाना और जोफिर हो जाए बारिश का आनायह ऐसा समीकरण है जैसे किमम्मी चप्पल ले तबीयत से
सुनो आज एक की महिमावेहद अनोखा इसका ज्ञानअबक नहीं यह केवल एकगाथा है यह अच्यंत महान एक है ईश्वर वही
मैं समय हूँ…. रुक नहीं सकता…!मैं यूँ ही बस इतिहास के पन्ने खंगाल रहा थाएक बात मेरे दृष्टिकोण को भेद
आज पार्क में मैंने अपने बचपन को देखावही जोश-ओ-जुनूं जिज्ञासा और चंचलताएक चिड़िया को देखकर खुश हो रही थीफोटो खींचकर
एक कौवा जो प्यासा थासोच से कुछ लंगड़ा थापूर्वजों से सुन रखा थाघड़े में पानी कम हो तोडाल घड़े में
तेरा नाम ले कर चलूंदिल की ख्वाहिश बोल दूँतेरी यादों के सफर मेंहर पल मैं यूं ही खो दूंसफ़ीने पे
मुफ्त का भोजन बंट रहा थाबांटता हाथ गर्व कर रहा थाजो दानी का दाहिना हाथ थाएक गर्दन अकड़ी खड़ी थीसामर्थ्य
कल कॉलोनी में रावण फिर जल गयाराख और कचरे के ढेर में बदल गयाकल कॉलोनी में रावण फिर जल गया
गरमी गदर मचा गई थीवर्षा भी कहर ढा गई थीपानी की ठंडक में मैंनेठण्ड से मुलाक़ात कीकई मुद्दों पर बात
सफर तुम्हारा हैदिन तुम्हारा हैवक्त तुम्हारा हैकिसी को फिर क्या दिखाना हैसजन घर जाना हैतो सज कर ही जाना है
जीना है तो आज ही जी लोबीत रहा है जो धीरे-धीरेजो करना है आज ही कर लोफिसल जाएगा ये धीरे
जितने पाँव पसारेगा तू उतना ही पछतायेगाइतनी औकात तेरी खाट में सिमट जाएगा जिस रोज़ बुलावा आएगा मटकी में सिमट